रांची:- झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच में अब कोचिंग संस्थानों की भूमिका भी चर्चा में आ गई है। जांच एजेंसियां उन संभावित कड़ियों को तलाश रही हैं, जिनके जरिए परीक्षा से जुड़े कथित नेटवर्क ने अभ्यर्थियों तक पहुंच बनाई होगी।
मामले में हुई छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और अन्य रिकॉर्ड को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इनसे कथित सिंडिकेट के काम करने के तरीके, आपसी संपर्क और पैसों के लेन-देन से जुड़ी जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
कोचिंग सेंटर क्यों जांच के घेरे में?
JPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कोचिंग संस्थानों से जुड़े रहते हैं। ऐसे में जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या किसी कोचिंग संस्थान, शिक्षक या उससे जुड़े व्यक्ति के माध्यम से कथित नेटवर्क को अभ्यर्थियों तक पहुंच मिली थी।
जांच का फोकस इस बात पर भी है कि परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को किसी तरह की गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराने, उनसे संपर्क करने या कथित तौर पर रकम लेने में किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका रही या नहीं।
छापेमारी में मिले डिजिटल साक्ष्य अहम
जांच के दौरान बरामद मोबाइल फोन, कंप्यूटर, दस्तावेज और अन्य डिजिटल सामग्री को खंगाला जा रहा है। इनमें मौजूद कॉल डिटेल, चैट, संपर्क सूची, लेन-देन और अन्य जानकारियां कथित नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।
एजेंसी यह भी देख सकती है कि किन लोगों के बीच लगातार संपर्क था और परीक्षा से पहले या बाद में उनके बीच किस तरह की गतिविधियां हुईं।
पैसों की कड़ी भी तलाश रही जांच एजेंसी
मामले में आर्थिक लेन-देन की जांच भी महत्वपूर्ण है। कथित तौर पर अभ्यर्थियों से रकम लिए जाने की बात सामने आने के बाद यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पैसा किसके पास पहुंचा और किन माध्यमों से उसका इस्तेमाल हुआ।
बैंक खातों, डिजिटल पेमेंट और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के जरिए कथित सिंडिकेट के आर्थिक नेटवर्क को समझने की कोशिश की जा रही है।
सामने आ सकते हैं कई नए नाम
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोगों, बिचौलियों और अन्य संदिग्ध संपर्कों के बारे में जानकारी सामने आने की संभावना है। छापेमारी में मिले साक्ष्यों और पूछताछ से यदि नई कड़ियां जुड़ती हैं, तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
हालांकि, फिलहाल किसी कोचिंग संस्थान या व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। जांच एजेंसियों द्वारा जुटाए जा रहे साक्ष्यों की पुष्टि और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किसी की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
जांच के नतीजे पर टिकी नजर
JPSC मामले में कथित सिंडिकेट की पूरी तस्वीर सामने लाने के लिए जांच एजेंसियां अलग-अलग कड़ियों को जोड़ रही हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि छापेमारी में मिले साक्ष्यों से किन लोगों के नाम सामने आते हैं और क्या कोचिंग नेटवर्क का इस मामले से कोई सीधा संबंध साबित होता है।


