चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर की ब्रांडिंग, कलरिंग, पीट निर्माण एवं अन्य कार्यों के लिए निकाले गए टेंडर में कथित अनियमितताओं का मामला अब जांच के दायरे में आ गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक वित्त सह प्रभारी पदाधिकारी ने मामले में सिविल सर्जन को जांच कर 7 दिनों के भीतर बिंदुवार रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
मामला टेंडर आईडी 2025-HLTH-108300-1 से जुड़ा है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, ऑनलाइन पोर्टल पर जानकारी अपडेट करने में देरी, निविदा शर्तों के संभावित उल्लंघन और सफल निविदादाताओं को कार्य आवंटन में नियमों की अनदेखी की गई।
दो फर्मों को करोड़ों का काम देने पर सवाल
आरोप के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया में सफल हुई 12 अन्य फर्मों को न तो कार्य आवंटन की जानकारी दी गई और न ही उनकी जमा अग्रिम राशि वापस की गई। वहीं, बाद में पलामू की राहुल इंटरप्राइजेज और चाईबासा के नीरज कुमार के बीच काम बांटे जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संचालित नहीं हुई और पोर्टल पर आवश्यक जानकारी समय पर अपडेट नहीं की गई। मामले में एआई शिहानं प्रा. लि. की ओर से भी प्रशासनिक जांच की मांग की गई थी।
सिविल सर्जन के पदभार ग्रहण के दिन ही जारी हुआ वर्क ऑर्डर
मामले में एक अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि सिविल सर्जन डॉ. जुझार मांझी के पदभार ग्रहण करने के दिन 26 मार्च को ही दोनों फर्मों को कार्य आवंटित कर दिया गया। इस संबंध में सिविल सर्जन ने प्रथम दृष्टया गड़बड़ी की आशंका जताते हुए कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, आवंटित कार्य पर रोक लगाने की बात भी सामने आई है।
12 सफल फर्मों को सूचना नहीं देने का आरोप
शिकायत के अनुसार, जनवरी में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की ब्रांडिंग और रिपेयरिंग के लिए टेंडर निकाला गया था। फरवरी में वित्तीय निविदा खोली गई, लेकिन इसके बाद करीब एक महीने तक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। मार्च में दो फर्मों के बीच काम बांटने का आरोप है।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि टेंडर में सफल अन्य फर्मों को पूरी प्रक्रिया से अलग रखा गया और उनके द्वारा जमा की गई करीब 12 लाख रुपये की अग्रिम राशि भी वापस नहीं की गई।
खबर प्रकाशित होने के बाद बढ़ी कार्रवाई
इस मामले को कशिश न्यूज द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता दिखाई। शिकायत के बाद मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। अब सिविल सर्जन को आरोपों की बिंदुवार जांच कर निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट सौंपनी होगी।
हालांकि, सूत्रों के अनुसार कुछ स्थानों पर आवंटित कार्य जारी रहने और कई जगह काम पूरा होने की भी बात सामने आ रही है। ऐसे में जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टेंडर प्रक्रिया में वास्तव में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं और इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं।
फिलहाल पूरे मामले में जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट सामने आने के बाद टेंडर प्रक्रिया, कार्य आवंटन और सरकारी राशि के इस्तेमाल को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।


